अल्लू अर्जुन हुआ अव्यवहारिक जेल प्रक्रिया का शिकार ! जेल सिस्टम सुधार हेतु कौन आयेगा आगे ?

अल्लू अर्जुन हुआ अव्यवहारिक जेल प्रक्रिया का शिकार ! जेल सिस्टम सुधार हेतु कौन आयेगा आगे ?

अल्लू अर्जुन एक बार फिर हुआ अव्यवहारिक प्रक्रियाओं के कारण सिस्टम का शिकार ! सवाल ये है कि जेल के अव्यवहारिक प्रक्रियाओं में सुधार करेगा कौन ?
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क्या कोई राजनीतिक नेतृत्व या कथित कलियुगी न्याय देवता जेल नियमों में अव्यवहारिक प्रक्रियाओं का अंत कर, जन सुविधाओं को प्राथमिकता देगा ?
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नूपुर तलवार प्रकरण में न्यायालय से बरी होने के वावजूद
एक सप्ताह लग गया था, तलवार दंपति को जेल से बाहर आने में !
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अल्लू अर्जुन, निचली अदालत ने जेल भेजने का आदेश पारित किया तो तत्काल जेल जाने के रास्ते में ही यह सूचना आ गई कि हाईकोर्ट से अल्लू अर्जुन को अंतरिम जमानत मिल गई !
फिर भी मात्र देरी से जेल में जमानत दस्तावेज पहुंचने के नाम पर एक दिन की अवैध हिरासत क्यों ?
किसी की स्वतंत्रता से अधिक मूल्यवान जेल की समय सीमा नियम नियम क्यों ?
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सलमान खान मामले में क्या हुआ था ? हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ त्वरित गति से सुप्रीम कोर्ट से स्टे मिला ओर त्वरित गति से रिहा हो गए ! ऐसा अल्लू अर्जुन मामले में क्यों नहीं हुआ, क्यों मात्र कुछ देर की देरी मात्र की वजह से रात भर अल्लू अर्जुन की स्वतंत्रता छीनी गई ?

यह सामाजिक संदेश और मैसेज जनसामान्य में अंतहीन काल तक चलता रहेगा कि “त्वरित न्याय केवल बड़े /सक्षम लोगो के लिए,सलमान खान जैसे लोगों के लिए है ? “
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सवाल अल्लू अर्जुन के या सलमान खान प्रकरण मात्र का नहीं है !
सवाल सिस्टम का है !
सवाल अव्यावहारिक प्रक्रियाओं का है !
जब अदालतें रात को खुल सकती है ! जब प्रशासन /पुलिस/राजनीतिक नेतृत्व/तमाम सरकारी एजेंसियां रात को या कभी भी कार्यवाही कर सकती है तो जेल प्रशासन में यह सुविधा क्यों नहीं ?
जब विमान अपहरण कांड में देर रात ने जज को नींद से जगाकर सजायप्ता मुजरिमों को बरी करने का आदेश जारी होता है और रात में जेल खुलवाकर विदेशी आतंकवादियों को रिहा कर विशेष विमान से कंधार ले जाया जाता है तो भारत के नागरिकों के लिए त्वरित न्याय क्यों नहीं, भारत के नागरिकों के लिए अव्यवहारिक प्रक्रियाएं क्यों ? क्यों अल्लू अर्जुन को अव्यवहारिक प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ा जिसकी वजह से उन्हें रात भर परतंत्र होकर कष्टमय जीवन व्यतीत करना पड़ा ? जेल अधिकारी, किसी को जमानत मिलने रिहा होने के न्यायालयीन आदेश के बाद एक मिनट की भी देरी अस्वीकार्य सिद्धांत पर काम क्यों नहीं करती है ?
क्या कोई मंत्री /,नेता/राजनीतिक नेतृत्व/न्यायपालिका इन सुधारों हेतु आगे आयेगे ?
पुष्पा 2 के हीरो अल्लू अर्जुन की जेल से रिहाई हो गई है। लेकिन, जेल नियमों पर सवाल भी खड़ा कर गई है ?कल उन्हें एक निचली अदालत के द्वारा 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था। हालांकि, तेलंगाना हाईकोर्ट ने इस मामले में तत्परता दिखाते हुए उन्हें अंतरिम जमानत दे दी है।

अल्लू अर्जुन के वकील अशोक रेड्डी ने चंचलगुडा जेल के बाहर मीडिया को बताया,” उन्हें रिहा कर दिया गया है।” हालांकि, उन्होंने आरोप लगाया कि जेल अधिकारियों ने हाईकोर्ट के आदेश की प्रति मिलने के बावजूद अल्लू अर्जुन को रिहा नहीं किया।

रिहाई में देरी पर भड़के वकील

रेड्डी ने कहा, ”आपको सरकार और विभाग से पूछना चाहिए कि उन्होंने आरोपी को रिहा क्यों नहीं किया। हाईकोर्ट का आदेश बहुत स्पष्ट है। जैसे ही जेल अधिकारियों को आदेश प्राप्त होता है, उन्हें तुरंत रिहा करना होता है। स्पष्ट आदेश के बावजूद उन्होंने रिहा नहीं किया, उन्हें जवाब देना होगा। यह एक अवैध हिरासत है। हम कानूनी कदम उठाएंगे।”

क्या है मामला?
आपको बता दें कि अल्लू अर्जुन को उनकी फिल्म ‘पुष्पा 2: द रूल’ के प्रीमियर के दौरान एक महिला की मौत के मामले में हैदराबाद पुलिस ने गिरफ्तार किया था। न्यायिक हिरासत के आदेश के बाद उन्हें कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच चंचलगुडा जेल भेज दिया गया था। चार दिसंबर की रात अभिनेता की एक झलक पाने के लिए बड़ी संख्या में प्रशंसक संध्या थिएटर में उमड़ पड़े थे। उसी दौरान भगदड़ मचने से 35 वर्षीय महिला रेवती की मौत हो गई थी और उनका आठ वर्षीय बेटा घायल हो गया था।

25 जनवरी तक के लिए राहत
हैदराबाद पुलिस ने महिला के परिवार द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर अल्लू अर्जुन, उनकी सुरक्षा टीम और थिएटर प्रबंधन के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 105 और 118 (1) के तहत चिक्कड़पल्ली थाने में मामला दर्ज किया है। अल्लू अर्जुन ने 11 दिसंबर को तेलंगाना उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाकर महिला की मौत के संबंध में उनके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने का अनुरोध किया था। हाईकोर्ट ने उन्हें चार सप्ताह की अंतरिम जमानत दे दी और मामले की अगली सुनवाई 21 जनवरी, 2025 तक के लिए स्थगित कर दी।

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