मंदिर में फिल्मी गानों पर रोक हेतु हिंदुओ को हाईकोर्ट तक जाना पड़ रहा है ?विचित्र स्थिति से गुजर रहा है हिन्दू ?
Only devotional songs should be played in Hindu temples, not film songs: Madras High Court | https://www.barandbench.com/news/only-devotional-songs-should-be-played-in-hindu-temples-not-film-songs-madras-high-court
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एक सनातनी devotee को साउथ के एक मंदिर में फिल्मी गानों के बजने पर मद्रास हाईकोर्ट तक का सफर करना पड़ा, इससे अधिक दुर्भाग्यजनक स्थिति और हो क्या सकती है ?
ये हमारे सारे के सारे कथित कथावाचकों, शंकराचार्यो की उदासीनता,निकम्मेपन की पराकाष्ठा नहीं तो क्या है ?आज तक हिंदुओ के पास सर्व सम्मति की सनातन धर्म संसद जैसी व्यवस्था नहीं है ?जो अपने धार्मिक स्थलों के मुद्दों,विवादों को अदालत तक जाने से रोके ? यदि हिंदुओ के धार्मिक स्थलो पर व्यवस्था के मामले भी अदालतों द्वारा निर्धारित किए जाने है तो इतने सारे शंकराचार्य /धार्मिक भगवाधारी ठूठ जो हिंदुओ का 56 भोग डकारते है ?वो निकम्मे किस काम के ? इतने सारे कथावाचक और करोड़ो बाबाओं का सम्मान करने वाले सनातनियों को /भक्त को /सनातनी अनुयाई को, यदि किसी मंदिर में फिल्मी गाने बंद कराने के लिए हाईकोर्ट से आदेश लाना पड़े तो अत्यधिक गंभीर चिंता का विषय है और सनातन को विधर्मियो से नहीं,जिहादियों से नहीं, सनातनी धार्मिक स्थलो के ठेकेदारों से अधिक खतरा है ! इसी याचिका में एक ओर मुद्दा था कि उक्त मंदिर को लंबे समय से बिना ट्रस्टी के, बिना मैनेजमेंट के, पिछले लम्बे समय से व्यवस्था की जनाबदेही विहीन था !
दोनों विषयों पर मद्रास हाईकोर्ट को उचित निर्णय देना पड़ा है ! ओर उक्त मंदिर में फिल्मी गानों पर तो तुरन्त रोक लगाई गई है ! मद्रास हाईकोर्ट के उक्त आदेश का लिंक प्रारंभ में दिया गया है !
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