पत्रकार ने खुद को समझा “SUPER VIP”नप गया,गया जेल,इंडिया न्यूज का पत्रकार !

पत्रकार ने खुद को समझा “SUPER VIP”नप गया,गया जेल,इंडिया न्यूज का पत्रकार !

पता नहीं क्या अहंकार, गुरूर है?चाहे कलम पकड़नी न आती हो ?दो कौड़ी की अक्ल हो ?लेकिन, पत्रकारिता के क्षेत्र में आते ही, खुद को इतने अधिक “,SUPER VIP” समझने लगते है ?कि, न्यायालय को भी कुछ नहीं समझते ? यदि किसी बड़े चैनल के बैनर तले काम करने का अवसर मिल जाए तो फिर तो कहना ही क्या ?

गुरुग्राम : नाबालिग बच्ची और उसके परिवार से जुड़े एक निजी वीडियो को तोड़-मरोड़कर अश्लील रूप में प्रस्तुत करने के मामले में गुरुग्राम की पोक्सो अदालत ने इंडिया न्यूज के तत्कालीन जोधपुर रिपोर्टर ललित बड़गुर्जर को जेल भेजने का आदेश दिया है। कोर्ट के आदेश के बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेकर जेल भेज दिया।

यह मामला वर्ष 2013 का है, जिसमें कुल आठ पत्रकारों पर पॉक्सो एक्ट, आईटी एक्ट और आईपीसी की कई धाराओं के तहत गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

क्या है पूरा मामला?

वर्ष 2013 में कुछ पत्रकारों ने कथित रूप से एक नाबालिग बच्ची और उसके परिवार से जुड़े निजी वीडियो को तोड़-मरोड़कर प्रसारित किया था। एफआईआर के मुताबिक, यह वीडियो बापू आसाराम जी के एक भक्त का था, जिसे गलत तरीके से पेश कर न केवल बच्ची और उसके परिवार की सामाजिक प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाई गई, बल्कि आसाराम बापू की छवि को भी खराब करने का प्रयास किया गया।

पीड़ित परिवार की शिकायत के आधार पर इन पत्रकारों के खिलाफ पॉक्सो एक्ट 14(1), 23, आईटी एक्ट 67(B), और आईपीसी की धारा 120-B, 471, 469 के तहत मामला दर्ज किया गया। कोर्ट ने 25 अगस्त 2023 को सभी पत्रकारों पर आरोप तय किए थे और ट्रायल प्रक्रिया जारी है।

इन 8 पत्रकारों पर लगे हैं आरोप

इस केस में 8 पत्रकार आरोपी हैं, जिनमें प्रमुख नाम इस प्रकार हैं : दीपक चौरसिया, चित्रा त्रिपाठी, अजीत अंजुम, सैयद सोहेल, राशिद हाशमी, अभिनव राज, ललित बड़गुर्जर आदि।

कोर्ट ने ट्रायल प्रक्रिया के दौरान सभी आरोपियों को हर सुनवाई में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने का आदेश दिया था।

कोर्ट में पेश न होने पर ललित बड़गुर्जर को भेजा गया जेल

हाल ही में, 11 फरवरी 2025 को ललित बड़गुर्जर की अदालत में अनुपस्थिति के चलते उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया था। इसके बाद 1 मार्च 2025 को हुई सुनवाई में उन्होंने अपनी गैरहाजिरी का कारण बताया, लेकिन कोर्ट ने इसे अस्वीकार कर दिया और सीधे जेल भेजने का आदेश दे दिया।

पहले भी हो चुके हैं गिरफ्तारी आदेश

इस केस में पहले भी कई पत्रकारों के खिलाफ गिरफ्तारी के आदेश जारी हो चुके हैं। चित्रा त्रिपाठी और सैयद सोहेल के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी हुआ था, लेकिन उन्हें हाईकोर्ट से जमानत मिल गई। दीपक चौरसिया पर भी गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया था, लेकिन हाईकोर्ट ने उन्हें 2 लाख रुपये के जुर्माने के साथ जमानत दी।

कोर्ट की सख्ती जारी, ट्रायल प्रक्रिया में कोई राहत नहीं

कोर्ट ने साफ कर दिया है कि सभी आरोपियों को हर सुनवाई पर अदालत में उपस्थित रहना अनिवार्य है। कोई भी लापरवाही ट्रायल में देरी का कारण नहीं बन सकती। ललित बड़गुर्जर की गैरहाजिरी को लेकर अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए उन्हें जेल भेज दिया है।

इस मामले की अगली सुनवाई जल्द होने वाली है, जिसमें अन्य पत्रकारों को भी अदालत में उपस्थित रहना होगा। कोर्ट की सख्ती को देखते हुए संभावना है कि यदि कोई और आरोपी सुनवाई में उपस्थित नहीं होता, तो उसके खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।

IPC के प्रावधानों के अनुसार उपरोक्त प्रकरण में पत्रकारों को सजा होने की पूरी संभावना है,क्योंकि, न्यायालय को अपने आदेश /निर्णय में यदि यह प्रतीत होता है कि आरोपी को बरी किया जाना है ?तो अंतिम निर्णय के समय आरोपी की उपस्थिति अनिवार्य नहीं होती ?न्यायालय तभी किसी आरोपी की उपस्थिति सुनिश्चित करता है जब संभावित फैसला आरोपी के विरुद्ध ओर सजा के योग्य हो ?

india9907418774@gmail.com

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