मी लार्ड,समय सीमा तो न्यायपालिका में भी नहीं है ?:तमिलनाडु राज्यपाल !
तमिलनाडु सरकार ओर राज्यपाल के बीच चल रही कथित रस्सा कसी के बीच तमिलनाडु सरकार की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने कुछ समय सीमा की बाध्यता तय की है ! हमे नहीं पता कि राज्यपाल, जो कि राष्ट्रपति का प्रतिनिधि होता है, उनके अधिकारों को सुप्रीम कोर्ट बायपास कर सकता है या नहीं, जबकि कहा यह जाता है कि न्यायपालिका की अंततः सर्वेसर्वा राष्ट्रपति ही होती है ! तभी तो सुप्रीम कोर्ट में अंतिम फैसले के वावजूद भी यदि किसी को किसी आरपाधिक मामले में फांसी की सजा दी जाती है तो राष्ट्रपति उसे माफी दे सकते है !
तमिलनाडु के राज्यपाल ने भी सुप्रीम कोर्ट पर सवाल दागा है कि, समय सीमा तो न्यायपालिका में भी नहीं है, लोगो के किसी भी मुकदमे में न्यायपालिका समय सीमा तय करे ! तो क्या, होश हवास उड़े न्यायपालिका के ?
वैसे भी देश की जनता न्यायपालिका के बारे में,जजों की कार्यप्रणाली के बारे सब कुछ देख ओर सुन रही है, एक भी गलत फैसला,जनपेक्षाओं के विरुद्ध फैसला सोशल मीडिया मंचो पर आलोचना का शिकार होता है, नूपुर शर्मा मामले में जस्टिस पादरीवाल को लाखो लोगों ने सोशल मीडिया मंचो पर अत्यधिक गंदी गंदी गालियों से नवाजा था क्योंकि उन्होंने अपना पदीय दुरुपयोग किया था ! कानून के विपरीत काम ओर गैर जिम्मेदाराना,सड़कछाप व्यक्ति की तरह, लेकिन जज की कुर्सी पर बैठकर कॉमेंट्स किया था ! यदि कोई एक व्यक्ति / एकाध व्यक्ति लिखित या मौखिक या सोशल मीडिया के किसी मंच पर न्यायपालिका की आलोचना करता है तो न्यायपालिका के लिए सुलभ रास्ता है आपराधिक अवमानना ?लेकिन जब लाखो करोड़ों लोग करे तो ? जस्टिस पादरीवाल मामले में भी यही हुआ, सोशल मीडिया मंच आलोचना से भर गया था, उन्होंने स्वीकार भी किया कि मुझे गंदी गंदी गालीयां दी जा रही है, लेकिन बेबस थे क्योंकि सामने भीडतंत्र था ! ऐसी बात नहीं है कि, सोशल मीडिया मंचो पर वायरल न्यायपालिका या किसी जज के खिलाफ आक्रोश रूपी आलोचना उन जजों तक नहीं पहुंचती है, किसी के किसी माध्यम से पहुंच ही जाती है, फर्क मात्र इतना है कि यदि कोई एकाध व्यक्ति करेगा तो न्यायपालिका का डंडा चलेगा और भीडतंत्र होगा तो कुछ नहीं होगा ! क्या पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में हिंदुओ की हत्या,लूटपाट,आगजनी,पुलिस वालो पर जानलेवा हमले पर मात्र सुप्रीम कोर्ट इसलिए संज्ञान नहीं लेगा क्योंकि वहां भीडतंत्र है ! क्या न्यायपालिका मणिपुर की तरह मुर्शिदाबाद में इसलिए दौरा नहीं करेगी क्योंकि वहां खतरनाक वाला जिहादियों का भीडतंत्र है ? मी लॉर्ड्स, तमिलनाडु के राज्यपाल के सवाल पर कब ज़बाब देंगे ? कि समयसीमा तो न्यायपालिका में भी तय नहीं है कि लोगों को कितने दिन मे न्याय मिलेगा ? जनता के प्रकरणों की कितने दिन के सुनवाई होगी ?ये भी समयसीमा तय कर दीजिए !
