क्या “अनाड़ी का खेलना?खेल का सत्यानाश”साबित होगा,जोगी कांग्रेस पार्टी का हाल ?
बिलासपुर : जोगी कांग्रेस के कर्ता धर्ता अमित जोगी पता नही किस राजनीतिक प्लानिंग के तहत धड़ाधड़ अपने अज्ञात प्रत्याशी घोषित करते जा रहे है,बहुत से ऐसे लोग है जिनका पहले राजनीति से कोई लेना देना नही रहा, इनके व्यक्तिगत संबंधों के आधार पर भले ही 100/50 वोट मिल जाए ? लेकिन,पार्टी का जनाधार तो उसी समय पता चल गया था जब बिलासपुर में जोगी कांग्रेस की पार्टी से चुनाव लडने वाले बृजेश साहू ने खर्च के मामले में जोगी कांग्रेस के तमाम अन्य प्रत्याशियों को पीछे छोड़ते हुए विगत विधानसभा चुनाव में सार्वाधिक खर्च करके भी मात्र 3500वोट हासिल हुए थे,अभी बिलासपुर विधानसभा से निर्दलीय चुनाव लडने वाले अखिलेश पांडे को अमित जोगी ने अपनी पार्टी जोगी कांग्रेस का अधिकृत प्रत्याशी घोषित किया है, जो 200/300वोटो से अधिक का नेता जनता को प्रतीत नही होता है ?
क्या अमित जोगी चुनाव आयोग के नियमो से अनभिज्ञ होकर पार्टी का संचालन कर रहे है ? चुनाव आयोग के नियमो के अनुसार पार्टी की राष्ट्रीय या क्षेत्रीय पार्टी की मान्यता और चुनाव चिन्ह बरकरार रखने के लिए 10% सीटो पर चुनाव लडना आवश्यक है और न्यूनतम 7%वोट हासिल करना जरूरी है,लेकिन अमित जोगी जिस तरह से 200/300वोट हासिल करने की क्षमता रखने वालो को अपना प्रत्याशी बनाते जा रहे है ?निश्चित रूप से पार्टी का क्षेत्रीय पार्टी का दर्जा सहित चुनाव चिन्ह भी निरस्त हो जायेगा और अगले चुनावों में निर्दलीय प्रत्याशियों की तरह अलग अलग विधानसभा क्षेत्रों में अलग अलग चुनाव चिन्ह आवंटित होंगे ? अमित जोगी को चाहिए था कि केवल उन जगहों पर अपना प्रत्याशी खड़ा करते ?जहा जहा पार्टी का अच्छा जनाधार है या प्रत्याशी इतना दमदार है कि न्यूनतम 7%वोट हासिल करने की निजी क्षमता धारी हो ? जिससे आने वाले समय में पार्टी की क्षेत्रीय पार्टी की मान्यता और चुनाव चिन्ह बरकरार रहे ? कही ऐसा न हो कि “अनाड़ी का खेलना,खेल का सत्यानाश” की तरह पार्टी बिना मान्यता प्राप्त वाली पार्टी बनकर रह जाए ?
स्वर्गीय अजीत जोगी जी की अभूतपूर्व मेहनत से बनी पार्टी, उस समय की व्यापक जनाधार वाली पार्टी की मान्यता और चुनाव चिन्ह बचाए रखने हेतु अमित जोगी को चुन चुनकर ठोस जनाधार वाले सीमित संख्या में प्रत्याशी खड़े कर, छत्तीसगढ़ की राजनीति में अहम भूमिका अदा करनी चाहिए !
