पैसे की भूख की तुलना धर्म/अधर्म से करने की जरूरत ! धार्मिक चंदा खाने वाले हो जाए सावधान,होगा ये ही हाल ?
कानपुर प्रेस क्लब के पूर्व अध्यक्ष, पत्रकार अवनीश दीक्षित की रिमांड अवधी पूरी हो गई. उसे कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया गया. रिमांड पर पुलिस उसका मोबाइल बरामद नहीं कर सकी. अलबत्ता, सबूत मिटाने की एवज में उस पर एक धारा और बढ़ाई जाएगी.
इससे पहले पुलिस पूछताछ में अवनीश ने लग्जरी गाड़ियों को लेकर पुलिस को बताया कि पिछले साल कानपुर देहात के रंजीतपुर में बागेश्वर वाले पंडा धीरेंद्र शास्त्री की कथा का आयोजन कराया था. उसमें सुनील शुक्ला भी आयोजनकर्ताओं में शामिल था. इन दोनों द्वारा अपने-अपने संपर्कों संबंधों को भुनाते हुए कई व्यापारियों से कथा के नाम पर करोड़ों रुपये वसूला गया था !
अवनीश दीक्षित कानपुर में पत्रकारिता की आड़ में माफिया के रूप में काम करते हुए कानपुर में एक हजार करोड़ से अधिक की अचल सम्पत्ति पर जबरन गुंडों के बल पर अवैध कब्जा करने का आरोपी है, जैसे जैसे जांच आगे बढ़ रही है अवनीश दीक्षित के काले कारनामों का भंडाफोड़ होता जा रहा है !पत्रकारिता की आड़ अपराध की दुनिया में माफिया बनने वाले ब्लेकमेलरो के लिए अवनीश दीक्षित एक उदाहरण होने चाहिए ! कि जब फूटेगा भांडा, तो अतीत के सब काले कारनामे देश दुनिया के सामने होंगे तो क्या करोगे ?एक धारा और बढ़ाई जाएगी.
था, जिसके बाद कानपुर देहात पुलिस ने आयोजन की इजाजत नहीं दी थी. ये लोग कथा के नाम जमा किया गया चंदा डकार गए. उसी पैसे से दो काली फॉर्च्यूनर गाड़ियां खरीदी गईं, जिसमें एक से अवनीश चलता है और दूसरी फॉर्च्यूनर सुनील शुक्ला के पास है.
अवनीश दीक्षित कानपुर में पत्रकारिता की आड़ में माफिया के रूप में काम करते हुए कानपुर में एक हजार करोड़ से अधिक की अचल सम्पत्ति पर जबरन गुंडों के बल पर अवैध कब्जा करने का आरोपी है, जैसे जैसे जांच आगे बढ़ रही है अवनीश दीक्षित के काले कारनामों का भंडाफोड़ होता जा रहा है !पत्रकारिता की आड़ में अपराध की दुनिया में माफिया बनने वाले ब्लेकमेलर पत्रकारों




के लिए अवनीश दीक्षित एक उदाहरण होने चाहिए ! कि जब फूटेगा भांडा, तो अतीत के सब काले कारनामे देश दुनिया के सामने होंगे तो क्या करोगे ?
