बैंक से कर्ज लेकर,लोगो में साहूकार जैसा व्यवहार करने की प्रवृति बढ़ी !
इज्जत का है ख्याल?तो न करे डिफॉल्ट ?
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मामला, कुछ न्यूज पोर्टल्स की सुर्खियों में है !
किसी अभिजीत पॉल की स्वीकार्यता अनुसार उन्होंने सेंट बैंक होम फाइनेंस लिमिटेड (बैंक) बिलासपुर शाखा से होम लोन लिया है, ओर समय पर किस्त न चुकाने पर बैंक द्वारा तकादा स्वाभाविक है !
एक दशक पहले तो बैंक वाले लगातार तीन किश्त न चुकाने वालों की फोटो सहित समाचार पत्र में बकायदा डिफाल्टर संबोधित करते हुए विज्ञापन प्रकाशित करवाने का अधिकार बैंक सुरक्षित रखते थे !
कथित अभिजीत पॉल ने अपनी ऑडियो खुद की वायरल कर खुद की इज्जत का ख्याल नहीं रखा, ओर जाने अनजाने में दूसरा अपराध कर बैठा कि बैंक अधिकारियों की बिना अनुमति बिना जानकारी,सहमति के कॉल रिकॉर्ड कर वायरल करना भी तो अपराध की श्रेणी में ही आता है !
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बैंको में लिक्विडिटी की भारी कमी है, बैंक पर अर्थात स्टॉफ पर वसूली का भारी दबाव है, फिर भी बैंक से कर्ज लेते समय ग्राहक जिस उदारता से मधुर व्यवहार करता है वही बैंकों से कर्ज लेने के बाद कर्जदार होते हुए भी लोग साहूकार जैसा व्यवहार करते है ?
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कर्ज वसूली में बैंकों के व्यापक अधिकारों में यह भी शामिल है कि कर्ज वसूली हेतु दबाव बनाने सहित सभी कानूनी कदम उठाए !
उचित यह होगा कि सभी कर्ज लेने वाले
लोग कर्ज लेते समय टर्म्स एंड कंडीशंस को ध्यान पूर्वक पढ़कर हस्ताक्षर करे !
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यदि है अपनी इज्जत और सम्मान का ख्याल ?तो न दे डिफॉल्ट पर ज्ञान ?

