क्या अब जनप्रतिनिधि भी होने लगे जन विरोधी ?
क्या अब जनप्रतिनिधि भी होने लगे जन विरोधी ?
यह सवाल इसलिए महत्वपूर्ण होता जा रहा है क्योंकि, कुछ मामलों में निर्वाचित जनप्रतिनिधि ही बने शिकायत कर्ता अपने ही मतदाताओं के विरुद्ध !
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पूर्व में बिलासपुर के ही एक पार्षद द्वारा अपने ही वार्ड के मतदाताओं /नागरिकों के भवन निर्माण में अनियमितताओं की शिकायत की थी,तब नगर निगम में संबंधित भवन निर्माताओं को भेजे नोटिस में प्रेषक के स्थान पर उक्त पार्षद का नाम लिखकर पार्षद द्वारा की गई शिकायत का हवाले देते हुए संबंधितों को नोटिस जारी किया था तब उक्त पार्षद के मतदाताओं को पता चला कि उनके रक्षक बनकर वोट हासिल करने वाले कलियुगी पार्षद ने अपने ही वार्ड के मतदाताओं की शिकायत किया है अन्यथा तो खुलासा ही नहीं होता कि शिकायत कर्ता कौन है ?
इसी तर्ज पर बिलासपुर संभाग के एक विधायक द्वारा तो अपने क्षेत्र के मतदाताओं के अवैध निर्माण पर कार्यवाही हेतु विधानसभा में ही प्रश्न उठा दिया था कि, मेरे निर्वाचन क्षेत्र में अवैध निर्माण पर कार्यवाही क्यों नहीं हो रही ?
बिना शिकायत दादा,भैया करने से आजकल को ढील ता नहीं है ये सभी को मालूम है ?
बड़ा सवाल, क्या अब जनहितैषी होने का दावा करने वाले जनप्रतिनिधि ही अपने ही मतदाताओं के लिए जनविरोधी साबित हो रहे है ?
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कुछ इसी तर्ज को आगे बढ़ाते हुए अब, जी टी इडेन रेजिडेंशियल सहकारी समिति मर्यादित द्वारा आयुक्त नगर पालिका निगम, पुलिस अधीक्षक, थाना सरकंडा ओर जोन आयुक्त नगर पालिका निगम को की गई शिकायत अनुसार पार्षद जय वाधवानी ने अपने 4/5 साथियों के साथ मिलकर सोसाइटी की दीवार में बड़ा सा होल कर क्षति ग्रस्त किया ! जिससे सोसायटी की संपति क्षति के साथ साथ सोसाइटी की सुरक्षा पर भी गंभीर संकट उत्पन्न। हुआ है !
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शिकायत अनुसार ?
क्या ? पार्षद की
यूं ही मनमानी को सत्ता का संरक्षण मिलेगा या होगी कोई कार्यवाही ?


